अपवाह फैलाने पर तीन फेसबुक पेज संचालकों के खिलाफ मुकदमा दर्ज

देहरादून। उत्तराखंड में मुख्यमंत्री बदलने संबंधी अफवाह फैलाने वालों के खिलाफ पुलिस एक्शन मोड में आ गई है। सोशल मीडिया पर भ्रामक और झूठी सूचनाएं प्रसारित कर लोगों को गुमराह करने वाले अराजक तत्वों पर अब पुलिस ने शिकंजा कसना शुरू कर दिया है। इसी कड़ी में दून बीजेपी महानगर अध्यक्ष सिद्धार्थ अग्रवाल की तहरीर पर कोतवाली पुलिस ने तीन फेसबुक पेज संचालकों के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया है।
दरअसल भारतीय जनता पार्टी महानगर अध्यक्ष सिद्धार्थ अग्रवाल ने नगर कोतवाली में एक शिकायत दर्ज कराई है। जिसमें उन्होंने बताया है कि आई लव माय उत्तराखंड संस्कृति, उत्तराखंड वाले और जनता जन आंदोलन इरिटेड नाम के फेसबुक पेज से मुख्यमंत्री परिवर्तन संबंधी झूठी एवं आपदा से संबंधित भ्रामक पोस्ट प्रसारित की गई थी। इस आधार पर तीनों पेज संचालकों के खिलाफ नगर कोतवाली में मुकदमा दर्ज किया गया है।
पुलिस की मानें तो इन दिनों बागेश्वर, उत्तरकाशी, चमोली, रुद्रप्रयाग और पिथौरागढ़ जिले आपदा से सबसे ज्यादा प्रभावित हैं। ऐसे कठिन समय में मुख्यमंत्री बदलने जैसी झूठी खबरें फैलाना न केवल राहत एवं बचाव कार्यों में व्यवधान उत्पन्न करता है। बल्कि, सरकारी कामकाज और प्रशासनिक व्यवस्था को भी प्रभावित करता है। फिलहाल, शिकायत के आधार पर पुलिस की ओर से मामले की बारीकी से जांच की जा रही है।
उत्तराखंड पुलिस ने आमजन से अपील की है कि सोशल मीडिया पर किसी भी प्रकार की अपुष्ट या भ्रामक सूचना का प्रसार करने से बचें। पुलिस ने स्पष्ट चेतावनी देते हुए कहा है कि किसी तरह की अफवाह फैलाने या भ्रामक पोस्ट करने पर उनके खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी। उत्तराखंड पुलिस की ओर से सोशल मीडिया की लगातार मॉनिटरिंग की जा रही है।
एसएसपी अजय सिंह ने बताया कि शिकायत मिलने पर जांच की गई। जांच में यह स्पष्ट हुआ है कि फेसबुक पेज आई लव माय उत्तराखंड संस्कृति, उत्तराखंड वाले और जनता जन आंदोलन इरिटेड से मुख्यमंत्री परिवर्तन संबंधी झूठी एवं भ्रामक पोस्ट प्रसारित की गई थीं। इस आधार पर तीनों पेज संचालकों के खिलाफ मुकदमा दर्ज कर उनके खिलाफ कठोर कानूनी कार्रवाई अमल में लाई जा रही है।
बता दें कि सोशल मीडिया के इस दौर में अक्सर लोग कुछ भी पोस्ट, फोटो, वीडियो आदि बिना पुष्टि किए आगे फॉरवर्ड कर देते हैं। जो अफवाह की वजह बन जाती है। जिससे भ्रम, डर और तनाव की स्थिति पैदा हो जाती है। सामाजिक, धार्मिक और राजनीतिक तनाव बढ़ने का खतरा बढ़ जाता है। इससे व्यक्तिगत यानी किसी की छवि धूमिल हो जाती है। इतना ही नहीं सुरक्षा को लेकर भी खतरा पैदा हो जाता है। ऐसे में किसी भी पोस्ट को बिना पुष्टि के साझा करने से बचें।