उत्तराखण्ड

अष्टमी पर मायके आईं मां नंदा-सुनंदा

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नैनीताल। कुमाऊं में मां नंदा-सुनंदा की धूम मची हुई है। अल्मोड़ा में कदली वृक्षों से मां नंदा-सुनंदा की मूर्ति निर्माण के बाद प्राण प्रतिष्ठा की गई। जिसके बाद चंद वंशजों ने देर रात तक पूजा अर्चना की। आज अष्टमी के दिन माता की मूर्ति के दर्शन भक्त कर पाएंगे। वहीं, नैनीताल में भी अष्टमी पर मां नंदा-सुनंदा मायके आईं हैं। जिनकी नैना देवी मंदिर में प्राण प्रतिष्ठा की गई। ऐतिहासिक नंदा देवी का मेला 16 वीं शताब्दी से चंद शासक बाज बहादुर चंद की ओर से की गई थी। अल्मोड़ा के नंदा देवी में लगने वाला यह मेला एक पौराणिक मेला है। भाद्र पक्ष की पंचमी से इस मेले की शुरुआत गणेश पूजन से होती है। षष्ठी के दिन कदली वृक्षों को आमंत्रण एवं सप्तमी को कदली वृक्षों को मंदिर परिसर में लाकर मूर्ति निर्माण किया जाता है।
मां नंदा-सुनंदा के मूर्तियों का निर्माण स्थानीय कलाकारों ने किया है। मूर्ति बनाने वाले स्थानीय कलाकार रवि गोयल ने बताया कि कदली वृक्षों के तनों और रिंगाल से मूर्ति का ढांचा बनाया जाता है, जिसके बाद उसमें आंख, नाक एवं अन्य अंग उकेरे जाते हैं। मूर्ति निर्माण वो पिछले कई सालों से कर रहे है। मूर्ति निर्माण की कला उन्होंने बुजुर्गों के मूर्ति निर्माण में सहायता करते हुए सीखी है।
मूर्ति निर्माण में लगे दूसरे कलाकार दीपक जोशी ने बताया कि वो पिछले 40 सालों से मां की मूर्ति का निर्माण कर रहे हैं। करीब 7 से 8 घंटे मूर्ति निर्माण में लग जाते हैं। देर रात तक मूर्ति निर्माण किया जाता है, जिसके बाद विधि विधान से उन मूर्तियों की प्राण प्रतिष्ठा की जाती है, जिसमें चंद वंशज शामिल होते हैं। वहीं, नंदा अष्टमी के दिन दर्शन के लिए भक्तों का तांता दर्शन को लगा रहता है। रात में साढ़े ग्यारह बजे से मंदिर में मां नंदा सुनंदा की मूर्तियों की प्राण प्रतिष्ठा के लिए विशेष पूजा अर्चना की गई। जिसमें चंद वंश के परिजन शामिल हुए। रात करीब 3 बजे तक यह विशेष पूजा पंडित तारा चंद्र जोशी और चंद वंशजों के पुरोहित पंडित नागेश पंत ने कराई। जिसके बाद मंदिर में मां की मूर्तियों को नंदा अष्टमी के अवसर पर दर्शन के लिए रखा गया है। वहीं, अष्टमी की रात को महा अनुष्ठान होगा।
नैनीताल में मां नंदा सुनंदा की प्रतिमाओं की प्राण प्रतिष्ठा के बाद भक्तों के दर्शन के लिए खोल दिया गया है। कुमाऊं की कुलदेवी मां नंदा-सुनंदा धार्मिक मान्यताओं के अनुसार आज अष्टमी के दिन अपने मायके धरती पर पधारी हैं। आज मूर्ति की प्राण प्रतिष्ठा के साथ ही मां नंदा-सुनंदा महोत्सव का आगाज हो गया है। परंपरा के तहत एकादशी यानी 5 सितंबर को कुलदेवी मां नंदा-सुनंदा अपने ससुराल लौट जाएंगी।
नंदा देवी मेला उत्सव के दौरान नंदा देवी परिसर भक्ति संगीत समेत कई सांस्कृतिक कार्यक्रमों का आयोजन किया जा रहा है। बीते दिनों मंदिर में माता की चौकी का आयोजन किया गया, जिसमें निर्मल पंत, अनिल सनवाल, संगीता जोशी, ललित प्रकाश, सुमन सनवाल, मोहन जोशी, दीप जोशी, राघव पंत और अशोक पांडे ने भजन गाए। वहीं, मां नंदा महिला समिति की ओर से आयोजित इस भक्तिमय कार्यक्रम से पूरा माहौल भक्ति में हो गया।

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