उत्तराखंड आयुर्वेद विश्वविद्यालय में करोड़ों के गड़बड़ी में विजिलेंस से खुली जांच को मंजूरी

देहरादून। उत्तराखंड आयुर्वेद विश्वविद्यालय में वित्तीय वर्ष 2017-22 के दौरान वेतन भुगतान, पदोन्नति, नियुक्तियों समेत वित्तीय स्वीकृतियों में तमाम अनियमितताएं सामने आई थी। जिसमें 13.10 करोड़ रुपए के भुगतान से जुड़े प्रशासकीय व वित्तीय अधिकारों का दुरुपयोग शामिल था। जिस पर मुख्यमंत्री पुष्कर धामी ने सख्ती दिखाई है। उन्होंने उत्तराखंड आयुर्वेद विश्वविद्यालय से संबंधित इस मामले की सतर्कता विभाग से खुली जांच कराए जाने की मंजूरी दे दी है।
दरअसल, कैग यानी भारत के नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक की साल 2019 की रिपोर्ट में वित्तीय अनियमितता की बात सामने आई थी। जब साल 2022 में सतर्कता विभाग (विजिलेंस) ने प्रारंभिक जांच की तो उस दौरान अवैध नियुक्तियों और वित्तीय गड़बड़ियों का खुलासा हुआ था।
इसके साथ ही वित्तीय वर्ष 2023-24 के विशेष ऑडिट में भी तमाम अनियमिताएं सामने आई थी। जिसके बाद वर्तमान साल 2025 में वित्त विभाग ने दोषी अधिकारियों से वसूली और कार्रवाई की बात कही थी। ऐसे में अब मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने सतर्कता विभाग से खुली जांच को मंजूरी दे दी है।
उत्तराखंड आयुर्वेद विश्वविद्यालय में बीते कई सालों में 13.10 करोड़ के भुगतान में प्रशासकीय व वित्तीय अधिकारों के दुरुपयोग होने का मामला सामने आया था। शासन की ओर से इस प्रकरण को गंभीरता से लेते हुए जांच कराए जाने का निर्णय लिया गया था। जिससे संबंधित प्रस्ताव पर मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने जांच को मंजूरी देते हुए सतर्कता विभाग से खुली जांच कराए जाने के निर्देश दिए हैं।
दरअसल, उत्तराखंड आयुर्वेद विश्वविद्यालय की स्थापना के बाद से ही भ्रष्टाचार के आरोप लगते रहे हैं। साल 2017 से 2022 के दौरान अवैध नियुक्तियां, सामान खरीद, निर्माण कार्यों और टेंडर प्रक्रियाओं में तमाम अनियमितताएं पाई गई थी। इसके बाद साल 2022 में मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने चार सदस्य समिति का गठन किया था। इसी साल यानी 2022 में विजिलेंस जांच के आदेश जारी हुए थे, प्रारंभिक जांच में भर्ती नियमों के उल्लंघन, पद होने के बावजूद प्रमोशन और एसीपी भुगतान के मामले सामने आए थे। इसके बाद मार्च 2023 तक विजिलेंस ने जांच के दौरान करीब ढाई सौ से 300 करोड़ रुपए के घोटाले की पुष्टि की थी।
इसकी रिपोर्ट विजिलेंस ने शासन को सौंप दी थी। साथ ही विजिलेंस ने उत्तराखंड आयुर्वेद विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. सुनील कुमार जोशी, पूर्व रजिस्ट्रार डॉ. राजेश अधाना और फाइनेंस कंट्रोलर अमित जैन के खिलाफ एफआईआर भी दर्ज की थी।





