गेहूं खरीद के लक्ष्य में ऐतिहासिक वृद्धि, 05 लाख कुंतल हुआ लक्ष्य, पहले था दस हजार
देहरादून। भारत सरकार ने गेहूं खरीद के लक्ष्य में ऐतिहासिक वृद्धि करते हुए इसे 5 लाख कुंतल कर दिया है। आयुक्त/सचिव, खाद्य नागरिक आपूर्ति आनन्द स्वरूप ने कहा कि पूर्व में भारत सरकार द्वारा राज्य के लिए गेहूं खरीद का लक्ष्य मात्र 10 हजार कुंतल निर्धारित किया गया था, जिससे किसानों में असंतोष की स्थिति उत्पन्न हो रही थी। राज्य सरकार द्वारा इस विषय को गंभीरता से उठाते हुए किसानों के हितों की प्रभावी पैरवी की गई, जिसके फलस्वरूप अब इसे 05 लाख कुंतल कर दिया है।
उन्होंने कहा कि लक्ष्य में यह उल्लेखनीय वृद्धि प्रदेश के कृषकों के लिए एक बड़ी राहत है तथा इससे अधिकाधिक किसानों को न्यूनतम समर्थन मूल्य का लाभ प्राप्त होगा। उन्होंने यह भी कहा कि इससे न केवल किसानों की आय में वृद्धि होगी, बल्कि राज्य में कृषि क्षेत्र को भी मजबूती मिलेगी और विपणन व्यवस्था में संतुलन स्थापित होगा। श्री आनन्द स्वरूप ने बताया कि राज्य में रबी विपणन सत्र 2026-27 का शुभारम्भ 01 अप्रैल, 2026 से हो चुका है। इस वर्ष गेहूं क्रय व्यवस्था को अधिक प्रभावी, पारदर्शी एवं किसान हितैषी बनाने के उद्देश्य से गढ़वाल सम्भाग में 45 एवं कुमाऊं सम्भाग में 123 सहित कुल 168 राजकीय क्रय केन्द्र संचालित किए जा रहे हैं, जिससे प्रदेश के अधिकाधिक कृषकों को अपनी उपज के विक्रय हेतु सुलभ एवं सुगम सुविधा उपलब्ध हो सके।
उन्होंने बताया कि भारत सरकार द्वारा गेहूं का न्यूनतम समर्थन मूल्य 2585 रुपये प्रति कुन्टल निर्धारित किया गया है, जिससे किसानों में अपनी उपज को राजकीय क्रय केन्द्रों पर विक्रय करने के प्रति उत्साह बढ़ा है। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार का प्रयास है कि प्रत्येक कृषक को उसकी उपज का उचित मूल्य समयबद्ध तरीके से प्राप्त हो तथा क्रय प्रक्रिया में किसी प्रकार की असुविधा उत्पन्न न हो। श्री आनन्द स्वरूप ने जानकारी दी कि वर्तमान तक स्मार्ट पीडीएस पोर्टल पर 1597 कृषकों द्वारा पंजीकरण कराया जा चुका है तथा 5852 कुन्टल गेहूं की खरीद की जा चुकी है। उन्होंने कहा कि यह आंकड़े इस बात का संकेत हैं कि राज्य में किसानों का भरोसा सरकारी क्रय व्यवस्था के प्रति निरंतर बढ़ रहा है और अधिकाधिक किसान इस व्यवस्था से जुड़ रहे हैं।
श्री स्वरूप ने बताया कि राज्य सरकार द्वारा क्रय प्रक्रिया को पूर्णतः पारदर्शी एवं सुचारू बनाए रखने हेतु स्मार्ट पीडीएस पोर्टल के माध्यम से पंजीकरण, सत्यापन एवं भुगतान की व्यवस्था की गई है, जिससे बिचौलियों की भूमिका समाप्त हो रही है और किसानों को सीधे लाभ प्राप्त हो रहा है। उन्होंने कहा कि सभी क्रय केन्द्रों पर आवश्यक व्यवस्थाएं सुनिश्चित की गई हैं, ताकि किसानों को किसी प्रकार की असुविधा का सामना न करना पड़े। उन्होंने कृषकों से अपील करते हुए कहा कि वे अपनी उपज का विक्रय निकटतम राजकीय क्रय केन्द्रों पर करें तथा न्यूनतम समर्थन मूल्य का अधिकतम लाभ उठाएं। उन्होंने आश्वस्त किया कि राज्य सरकार किसानों के हितों की रक्षा एवं उनके आर्थिक सशक्तिकरण के लिए पूर्ण प्रतिबद्धता के साथ कार्य कर रही है।





