उत्तराखण्ड

1,218 दिनों में सरदार साहब ने वह कर दिया, जो कई बड़े नेता पूरे जीवनकाल में नहीं कर पाएः अमित शाह

ख़बर शेयर करें

नई दिल्ली। भारत के इतिहास में सरदार वल्लभभाई पटेल का नाम उस लौह स्तंभ की तरह दर्ज है, जिसने आजादी के बाद बिखरने की आशंकाओं के बीच देश को एकता के सूत्र में पिरोकर अखंड भारत की नींव रखी। सरदार साहब की 151वीं जयंती पर राष्ट्रीय एकता दिवस के अवसर पर दिल्ली में अमित शाह ने एकता दौड़ का शुभारंभ किया। इस अवसर पर उन्होंने याद दिलाया कि कैसे मात्र 1,218 दिनों में सरदार पटेल ने वह कर दिखाया, जिसे पूरी दुनिया असंभव मान रही थी। जब भारत आजाद हुआ, तब सैकड़ों रियासतों में बंटे देश के भविष्य पर सवाल उठ रहे थे। लेकिन सरदार पटेल की राजनीतिक दूरदर्शिता, असाधारण कूटनीति और लौह इच्छाशक्ति ने इन आशंकाओं को ध्वस्त कर दिया। उन्होंने बिखरी रियासतों को एक माला में पिरोकर आधुनिक भारत के भूगोल को नई पहचान दी। वे केवल स्वतंत्रता संग्राम के नायक नहीं, बल्कि अखंड भारत के ऐसे शिल्पकार थे, जिन्होंने इतिहास की दिशा बदल दी।
दुर्भाग्यपूर्ण रहा कि कांग्रेस के शासनकाल में सरदार पटेल को उनके योगदान के अनुरूप सम्मान नहीं मिला। कांग्रेस ने उनके विराट व्यक्तित्व को भुलाने का प्रयास किया, लेकिन इतिहास के सूर्य को राजनीतिक उपेक्षा के बादलों से नहीं ढका जा सकता। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने गुजरात के मुख्यमंत्री रहते हुए स्टैच्यू ऑफ यूनिटी का निर्माण कर सरदार साहब को वैश्विक पहचान दिलाई। आज यह प्रतिमा उनके व्यक्तित्व और अखंड भारत के संकल्प का प्रतीक है। जिस तरह सरदार पटेल ने अपनी दृढ़ इच्छाशक्ति से सैकड़ों रियासतों को एक सूत्र में बांधा था, उसी तरह मोदी सरकार में अमित शाह उनके पदचिह्नों पर चलते हुए देश की आंतरिक सुरक्षा और एकता को मजबूत कर रहे हैं। उनके नेतृत्व में 31 मार्च 2026 को भारत नक्सलवाद से मुक्त हुआ। अब अगला लक्ष्य 31 दिसंबर 2029 तक देश को नशामुक्त बनाना है। यह केवल नशे के विरुद्ध अभियान नहीं, बल्कि देश की युवा शक्ति को सुरक्षित रखने और विकसित भारत की मजबूत नींव तैयार करने का संकल्प है। सरदार पटेल ने अपने समय में देश के विखंडन की चुनौती को परास्त किया था। आज अमित शाह उसी लौह इच्छाशक्ति के साथ भारत को आंतरिक चुनौतियों से मुक्त करने की दिशा में आगे बढ़ रहे हैं।

Related Articles

Back to top button