उत्तराखण्ड

युवाओं में बढ़ रही किडनी की समस्याः डॉ. नीतीश देव

ख़बर शेयर करें

देहरादून। सालों से ऐसा माना जाता रहा है कि किडनी की बीमारियां सिर्फ बुजुर्गों को ही होती हैं। हालांकि अब युवा भी किडनी की बीमारियों से ग्रसित हो रहे हैं खासकर तब जब ऐसे युवा डायबिटीज, हाई ब्लड प्रेशर, मोटापा, खराब खान-पान और कुछ दवाएं जैसे रिस्क फैक्टर से जूझ रहे होते हैं। किडनी की बीमारी चुपचाप बिना किसी लक्षण के बढ़ती है। किडनी शरीर का बहुत काम करने वाला अंग होता हैं। कोई भी व्यक्ति लक्षण दिखने से पहले ही अपनी किडनी की काफी कार्यक्षमता खो सकता है। इसलिए दर्द या पेशाब में बदलाव का इंतजार करने के बजाय समय पर चेकअप करवाना जरूरी है। इससे किडनी की बीमारी का जल्दी पता लगाकर सही इलाज शुरू किया जा सकता है।
आरजी हॉस्पिटल्स देहरादून के यूरोलॉजी, एंड्रोलॉजी-रीनल ट्रांसप्लांट के कंसलटेंट डॉ. नीतीश देव ने बताया, “ हम ऐसे मरीजों को देख रहे हैं जिनकी उम्र 20 या 30 के करीब है और वे किडनी डैमेज की समस्या से ग्रसित हैं। यह किडनी की बीमारी उनमें सालों से पनपती रही। जिस तरह से अन्य अंगों में कोई समस्या होती है तो उसका लक्षण नजर आता है उस तरह से किडनी कोई लक्षण प्रदर्शित नहीं करती है। लक्षण न दिखने के कारण ही युवाओं को लगता है कि उन्हें किडनी की बीमारी नहीं हो सकती है।”
पिछले एक दशक में हमने युवा भारतीयों की सेहत में काफी बड़ा बदलाव देखा है। सुस्त लाइफस्टाइल, एक्सरसाइज की कमी, बढ़ता मोटापा और ज्यादा प्रोसेस्ड और नमकीन खाना इस समस्या को बढ़ा रहा है। डायबिटीज और हाई ब्लड प्रेशर के बढ़ते मामले खास तौर पर चिंता की बात हैं क्योंकि ये दोनों बीमारियां धीरे-धीरे किडनी को नुकसान पहुंचा सकती हैं। अगर ब्लड शुगर या ब्लड प्रेशर को ठीक से नियंत्रित नहीं किया जाता है, तो कम उम्र के लोगों को भी उम्मीद से बहुत पहले किडनी की बीमारी हो सकती है।
डिहाइड्रेशन किडनी की बीमारी का एक और बड़ा रिस्क फैक्टर है, खासकर बहुत ज्यादा गर्मी, बाहर काम करने या भारी एक्सरसाइज के दौरान डीहाइड्रेशन होने पर किडनी प्रभावित हो सकती है। इससे किडनी में पथरी होने का ख़तरा बढ़ सकता है और गंभीर मामलों में अचानक किडनी डैमेज हो सकता है। डॉक्टर की सलाह के बिना दवाएँ लेना भी एक चिंता का विषय है। छै।प्क्े जैसी पेनकिलर और अनरेगुलेटेड हर्बल या डाइटरी सप्लीमेंट्स में कभी-कभी ऐसी चीजें हो सकती हैं जो किडनी को नुकसान पहुँचा सकती हैं। जब तक आंखों या टखनों के आसपास सूजन, लगातार थकान, झागदार या गहरे रंग का यूरिन, कम यूरिन, सांस लेने में दिक्कत, या बिना किसी वजह के जी मिचलाना जैसे लक्षण दिखते हैं, तब तक किडनी काफी हद तक नुकसानग्रस्त हो सकती है। जिन युवाओं को डायबिटीज, हाई ब्लड प्रेशर, मोटापा, किडनी की बीमारी की फैमिली हिस्ट्री, बार-बार किडनी स्टोन, या बार-बार यूरिन इन्फेक्शन होता है, उन्हें किडनी स्क्रीनिंग के बारे में डॉक्टर से बात करनी चाहिए। बेसिक किडनी स्क्रीनिंग में आमतौर पर ब्लड प्रेशर की जांच, किडनी फंक्शन की जांच के लिए ब्लड टेस्ट, और प्रोटीन या ब्लड के लिए यूरिन टेस्ट शामिल होते हैं। व्यक्ति के रिस्क के आधार पर डॉक्टर आगे के टेस्ट कराने का सुझाव दे सकते हैं।
किडनी को सेहतमंद रखने के लिए हमे बहुत ज्यादा प्रयास करने की जरूरत नही होती है। बस वजन को स्वस्थ रखना, शारीरिक रूप से सक्रिय रहना, ब्लड प्रेशर और ब्लड शुगर को नियंत्रित रखना, नमक का सेवन कम करना और खूद से दवा खाने के बजाय डॉक्टर से सलाह लेना आदि जैसी सावधानियां हमारी किडनी को स्वस्थ रख सकती हैं।  बेहतर हाइड्रेशन भी जरूरी है, खासकर गर्म मौसम में या ज्यादा मेहनत वाले काम के दौरान पानी खूब पीना चाहिए। हालांकि जिन लोगों को पहले से किडनी, हार्ट या लीवर की कोई बीमारी है, उन्हें खुद से ज्यादा पानी पीने के बजाय अपने डॉक्टर की बताई खास सलाह माननी चाहिए। इसका मकसद हर लक्षण को लेकर चिंता पैदा करना नहीं है, बल्कि युवा भारतीयों में रिस्क फैक्टर और समय पर स्क्रीनिंग की अहमियत के बारे में जागरूकता बढ़ाना है।

Related Articles

Back to top button